-: अमृतवाणी :-(2)

दष्श्टान्त के माध्यम से उपदेष-

ईसा मसीह ने एक बार कहा कि किसी मनुश्य के दो पुत्र थे। उनमें से छोटे वाले पुत्र ने पिता से कहा कि हे पिता जी सम्पत्ति मे जो भाग मेरा है वह मुझे दे दीजिए। उसने पुत्र को उसके हिस्से की सम्पत्ति बांट दी।
छोटा पुत्र अपने हिस्से की सभी सम्पत्ति बटोर कर कही दूसरे देष चला गया। वहां जाकर वह कुकर्म में पड़ गया जिससे उसकी सारी सम्पत्ति नश्ट हो गयी। अब तो वह भूखों मरने की स्थिति में आ गया। दुर्भाग्यवष उस देष में अकाल भी पड़ गया। कुछ उपाय न सूझने पर ेवह उस देष के एक व्यक्ति के यहां पहुॅच गया जिसने उसे सूअर चराने के लिए भेज दिया। खाने पीने के लिए कुछ भी नही दिया। जब वह सूअर चराने गांव के बाहर गया तो उसने सोचा कि मालिक ने तो मुझे खाने के लिए कुछ दिया नहीं इस पर उसने विचार किया क्यों न सड़क पर पड़ी फलियों जिन्हें सुअर खा रहे है को खाकर अपना पेट भरूॅ। सड़क पर पड़ी हुई फलियों को खाने के बाद जब वह कुछ तष्प्त हुआ तो विचार करने लगा कि हमारे पिता जी के यहां जो मजदूर कार्य करते हैं उन्हें मजदूरी से अधिक भोजन मिलता है लेकिन एक मै हूॅ जिसे मजदूरी तो क्या खाने के लिए एक रोटी भी नहीं मिल रही है। बहुत परेषान हो गया। उसने अपने मन में विचार किया कि मै अपनी गलती से यहां भूॅखों मर रहा हॅॅॅू।
ऐसा विचार करने के बाद उसने कहा कि अब वह अपने देष अपने पिता के पास जाउॅगा और अपने पिता से मिलकर कहूॅगा कि हे पिता जी मैने स्वर्ग का परित्याग व विरोध किया इसलिए अब मै आपका पुत्र कहलाने लायक नहीं हॅू फिर भी आप मुझे अपने यहां मजदूर की भंाति अपने यहां रख लें कम से कम मेरी जीविका तो चल जायेगी। ऐसा विचार कर वह अपने पिजा के यहां चल दिया।
अपने पिता के घर के निकट जब वह पहुॅचा तो उसके पिता ने उसे दूर से ही देख लिया और दौड़कर उसके पास पहुॅच कर उसे अपने गले से लगा लिया और बहुत दुलार किया। पुत्र ने अपने पिता से कहा कि हे पिता जी मैने स्वर्ग का विरोध किया है अब मै इस लायक नहीं रहा कि मै आपका पुत्र कहलाउॅ। परन्तु पिता जी ने अपने दासों से कहा कि घर जा कर अच्छे-अच्छे कपड़े व जूते आदि लाकर मेरे प्यारे पुत्र को पहनाओं यही नहीं अच्छे-अच्छे पकवान भी बनवाओ जिससे हमारा यह पुत्र उसे खाकर आनन्द मनायें।
पिता ने कहा कि यह हमारा पुत्र मर गया था अब यह फिर से जीवित हो गया है। खो गया था मिल गया ऐसा कहकर आनन्द मनाने लगा। उसका बड़ा पुत्र खेत में गया था जब वह घर लौटा तो घर में बहुत ही उत्साह था बाजे आदि बज रहे थे। उसने एक दास को अपने पास बुलाकर कि घर में यह क्या हो रहा है। दास ने कहा कि तेरा भाई आया है इसलिए तेरे पिता ने बहुत धन खर्च करके उत्सव मना रहे है। यह सुनकर वह बहुत क्रोधित हुआ उसका मन घर के भीतर जाने का नहीं किया। परन्तु उसके पिता ने उसे देख लिया और वह घर के बाहर आकर उसे मनाने लगे। बड़े पुत्र ने कहा इतने दिनों से मै आपकी सेवा कर रहा हूॅ आपने कभी भी हमारे लिए इतना अधिक उत्सव नहीं किया लेकिन जो पुत्र अपना हिस्सा लेकर बेच खा लिया उसके आने पर उसका इतना बड़ा सत्कार। इस पर पिता ने कहा कि पुत्र तू सदैव मेरे साथ है। जो कुछ मेरा है वह सभी कुछ तेरा है। परन्तु अब हमे प्रसन्न होना चाहिए क्योंकि यह तेरा भाई मर गया था और फिर से जीवित हो गया। खो गया था मिल गया। कहने का तात्पर्य यह कि जब कोई बिगड़ा हुआ व्यक्ति सत्य मार्ग पर आ जाय तो उसके लिए प्रसन्न होना ही चाहिए।
 
पृष्ठ - (1), (2)