परम पूज्य श्री रामप्रसाद जी महाराज का परिचय

परिचय

संगीतमय श्रीरामकथा के सुप्रसिद्व वक्ता परम पूज्य श्री रामप्रसाद व्यास जी महाराज का जन्म ऋषि शिरोमणि भरद्वाज जी की तपस्थली तीर्थराज ;प्रयाग इलाहाबाद जिले के ग्राम झीरी-लच्छीपुर मदरा में 25,मई सन् 1965 में मंगलवार के दिन श्रीरामनवमी को दोपहर 12 बजे एक वैष्णव परिवार में हुआ था। श्रीरामनवमी के दिन पैदा होने के कारण इनके माता पिता ने इनका नाम राम प्रसाद रखा। श्री महाराज प्रतिवर्ष रामनवमी के दिन अयोध्या में आयोजित होने वाले श्रीराम जन्मोत्सव का दर्शन व सरयू स्नान करने के लिए अयोध्या अवश्य पधारते है। श्री महाराज की प्रारम्भिक से लेकर इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा गांव के आस-पास ही हुई। स्नातक एवं स्नातकोत्तर तक की शिक्षा कानपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद श्री महाराज ने हिन्दी शार्टहैण्ड व हिन्दी टाइप की शिक्षा राजर्षि टण्डन हिन्दी विद्यापीठ इलाहाबाद से प्राप्त की। शिक्षा प्राप्त करने के बाद सरकारी नौकरी न करके वह मिर्जापुर स्थित एक कोचिंग सेन्टर में प्रशिक्षक के रूप में कार्य करने लगे। इनके द्वारा पढ़ाये हुए कई शिष्य एवं शिष्याएं देश व प्रदेश के विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में आशुलिपिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे है। उसके बाद सन् 1992 में वह मीडिया से जुड़ गये। इस दौरान उन्होंने देश व प्रदेश के विभिन्न अखबारों में पत्रकार एवं संपादक के रूप में अपनी सेवाएं दी। इसी दौरान वर्ष 2005 में श्री महाराज को पूज्य संत स्वामी भगवानदास शास्त्री जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। इनके द्वारा उन्हें श्रीराम कथा कहने की प्रेरणा प्राप्त हुई। वैसे औपचारिक रूप से इनका कोई कथा गुरू नही है। इन्होंने एकलब्य की भांति श्री हनुमान जी को ही अपना गुरू मानकर रामकथा कहने का अभ्यास किया। अब तक श्री महाराज देश व प्रदेश में कई स्थानों पर संगीतमय श्री रामकथा कह चुके है। परन्तु उन्हें जब भी समय मिलता है वह देश के अनेकानेक कथावाचकों की संगीतमय कथाओं को समय-समय पर बड़े चाव से सुनते है। इनके इष्ट भक्तराज हनुमान जी महाराज ही है। वह अपना सभी कार्य श्री हनुमान जी का ही नाम लेकर ही प्रारम्भ करते है। वह इलाहाबाद में मौजूद रहने पर हर शनिवार को तीर्थराज प्रयाग के संगम तट पर स्थित लेटे हनुमान जी के मंदिर में जाकर उनका दर्शन व पूजन अवश्य करते है।